बचपन का घर - Purana Ghar | Memories | Poetry | Emotions
पुराना घर(Old Home)
Ghar: Stories and Memories from My Childhood Home
मेरा वो घर जहाँ मेरा बचपन पला ,
वक़्त के साथ आज वो भी बूढ़ा हो चला....
सुनी दीवारें आज भी राह ताकती हैं...
कभी बन्द खिड़की तो कभी बंद दरवाज़ों से झाँकती हैं....
बड़ा सा वो आँगन भी आज वीरान पड़ा है...
कही घास कहीं पत्तों तो कहीं मिट्टी से घिरा है...
जिसके हर कोने को था कभी बड़े प्यार से सजाया...
आगे बढ़ने की दौड़ में जिसे पीछे छोड़ आया....
खवाहिश है कि...
भागती ज़िंदगी से कुछ वक़्त निकाल पाऊँ....
सुकून के कुछ लम्हे फिर उस घर में बीता पाऊँ....
घर (home)
यूँ पुरखों की जमीन बेचकर
शहर मे ना जाया करो
.
.
ना जाने कब लौटना पड़े .. गाँव मे भी एक घर बनाया करो… ?
घर क्या होता है ? कविता(Poem)
भटक आता हूं पूरी दुनिया में…थक हार कर एक ही मंज़िल की तलाश रहती है!
ज़िन्दगी न जाने क्यों आजकल मुझसे इतनी हताश रहती है!
मुझे सुकून तब तक किसी पहर नहीं मिलता…
जब तक मुझे मेरा घर नहीं मिलता!
आनंद मिलता है अक्सर, नये सफ़र में…
पर चैन मुझको किधर नहीं मिलता…
जब तक मुझे मेरा घर नहीं मिलता!
मिलता है यारों का साथ मुझे दफ्तर में…
सड़कों पर भीड़ का शोर भी मैं सहता हूं!
घर लौटता हूं तो मां पूछतीं है कि,
बेटा तेरे लहज़े में असर नहीं मिलता!
मैं कहता हूं माँ थका हारा हुआ हूँ!
वक़्त-हालात का मारा हुआ हूँ!
ये घर भी तेरे ही आंचल सा सुखद है…
मां मुझको तब तक सुकूँ नहीं मिलता…
कि जब तक तेरे हाथों तले मेरा सर नहीं मिलता…
और जब तक मुझे मेरा घर नहीं मिलता!
Comments:
@lifedb_official #lifedb_official
visit site for more blogs - https://lifedb.in/
You may also like: 20 Blog Ideas and Topics to Write About | What do you write in a blog ?
Leave a Reply
Please log in to comment on this post.
1 Comments
Very Nice and Emotional Poetry....